कविता - ए - रुख़सती
Rukhsat hindi sad poem
रो मत पड़ना, हमारे बिछड़ जाने से, दर्द सिर्फ तुझे हुआ है
कुछ इजाजतों की जरूरत थी, करना इश्क हमने भी कुछ कम न हुआ है
वक्त तो मैने भी बिताया है तेरे संग, तुझे पाया है हर पल,
यादें तेरे साथ भी जुड़ी हैं, आदत मुझे भी पड़ी है
बिछड़ना तो था ही एक दिन, फिर गम क्यों नही हुआ है
मान न मान, प्यार हमे भी कुछ कम न हुआ है
तेरे किरदार को हमने भी जाना था, तेरे ख्वाबों में हमे भी आना था
चलना था संग तेरे, तेरा साथ निभाना था
खुद के साथ साथ, दुनिया को भी समझाना था
अपने तो ख्यालात तो बेहतरीन थे, बस रब को समझाना था
मेरे नसीबों में जो भी लिखा हो, तकदीर में तेरा नाम तेरा लिखाना था
अब प्यार की अहमियत समझ न समझ, पर दर्द हमे भी कुछ कम न हुआ है
पता है मुझे तेरा प्यार सच्चा है, तेरे ख्वाबों में मेरा आना पक्का है
तूने न जाने कितने सपने सजाएं होंगे, चलते रास्ते पे कितने काटें बोए होंगे
तेरे हर दर्द से वाकिफ हु मैं, मुझे पता है तेरे काबिल हु मैं
तुझे अलविदा कहना मेरे लिए भी एक दर्द था
एक बात कहूँ, प्यार फिर भी कम नही हुआ है।

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